Tuesday, June 04, 2019

चाकुलिया की जमुना दीदी पर्यावरण संरक्षण के लिए समूचे देश की प्रेरणा हैं


दुनिया भर में पर्यावरण चिंता का विषय बना हुआ है। बढ़ती जनसंख्या, दिनों दिन घटते जंगल पर्यावरण संतुलन को तहस-नहस कर रहे है। विकास की अंधाधुंध दौड़ में सबसे ज्यादा नुकसान पर्यावरण को ही होता है। अब पर्यावरण व पेड़ो को बचाने के लिए तरह-तरह के प्रयोग सुनने को मिलते है। फिलीपींस में 10 पेड़ लगाने के बाद ही ग्रेजुएशन की डिग्री का अनूठा प्रयोग इनदिनों चर्चा में है, वही चंबल इलाके में हथियारों के एप्लिकेशन हेतु कम से कम 10 पेड़ लगाकर एक महीने तक पेड़ो की सेवा करने का आदेश आया है। 

इन सभी सुर्खियों से इतर झारखण्ड राज्य के पूर्वी सिंहभूम जिले स्थित चाकुलिया की जमुना टुडू दीदी आज पर्यावरण संरक्षण के लिए समूचे देश की प्रेरणा है। जमुना दीदी ने लगभग 22 सालों पहले जंगलों को बचाने की मुहिम शुरू की थी। आज जमुना जी की प्रेरणा से वन समितियों से जुड़ी हज़ारों महिलाएं रोजाना जंगलों की देख भाल करती है। 

जंगल माफियाओं के जानलेवा हमलों से सालों-साल लोहा लेते हुए सैकड़ों बीघे जंगल बचाने का सफर आसान नहीं था, यहां पग-पग पर रास्ते कंटीले है। इन कंटीले रास्तों पर चलते हुए जमुना दीदी ने गांव से राष्ट्रपति भवन तक का सफ़र तय किया। सभी को जमुना दीदी की कहानी विस्तार से जरूर जाननी चाहिये।

जमुना दीदी को जंगलों को बचाने की शुरुआती प्रेरणा अपने पिता और परिवार से मिली थी। जमुना दीदी के पिता ने ओडिसा में पथरीले जमीन का सीने पर पेड़ो को अपने पसीने से सींच कर जंगल बनाया था। यह सभी अभिभावकों के लिए एक सीखने लायक चीज़ है, हमे अपने बच्चों को पर्यावरण की रक्षा करने के लिए रोजाना प्रेरित करना चाहिए, ताकि उन्हें कल जीने लायक धरती मिल सके। 

..तो आइये आज के दिन हम सब प्रण ले कि हम पर्यावरण के लिए केवल चिंता नही जाहिर करेंगे, इसे बचाने के लिए अपना भरसक योगदान देंगे। इसके अलावा हमें जन्मदिन, नाम संस्कार, विवाह समारोह व अन्य महोत्सवों के अवसर पर सालों भर पेड़ लगाने का रिवाज नियमित रूप से शुरू करना चाहिए। 

मैंने भी पिछले कई वर्षों में 10 से ज्यादा पौधों को लगाकर उन्हें पेड़ बनाने की कोशिश में हूँ। आप भी ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाए, पर्यावरण के लिए खतरा ना पैदा करें, पर्यावरण बचाये।

तस्वीर विवरण: चाकुलिया के मुटुरखाम गांव के समीप जंगलों की रखवाली करती पदमश्री जमुना टुडू जी। यहां कुल्हाड़ी का उपयोग महिलाएं वन माफियाओं व जंगलों के दुश्मनों से लोहा लेने में करती है। विज्ञान के अविष्कारों के सकारात्मक व नकारात्मक उपयोग का एक और सशक्त उदाहरण।

तरुण कुमार