Friday, February 22, 2019

आदिवासियों को जंगल ख़ाली करने का आदेश देना अनैतिक है


सुप्रीमकोर्ट ने क़रीब 16 राज्यों के लाखों आदिवासियों और पारंपरिक जंगलवासियों को जुलाई तक जंगल ख़ाली करने का आदेश दिया। आदिवासी जंगलों में तब से रह रहे हैं जब देश की सीमा भी निर्धारित नहीं हुयी थी। उनकी संस्कृति इतनी पुरानी है कि जब आपका इतिहास शुरू भी नहीं हुआ था। न आपका मौजूदा क़ानून था, न न्यायालय न संविधान। 

वो जहाँ रह रहे हैं, प्राकृतिक न्याय के हिसाब से वहाँ जल-जंगल-ज़मीन के असली मालिक हैं। उनको वहाँ से उजाड़कर कहीं और भेजना मौजूदा क़ानून, संविधान, न्यायालय, राजनैतिक सीमा की नैतिक हैसियत से बाहर है। देश के तथाकथित विकास के लिए उनके जल-जंगल-ज़मीन से उन्हें बेदख़ल करना न्याय की किसी भी परिभाषा से सही नहीं हो सकता।

बेशर्म, बेगैरत मुख्यधारा की जनसंख्या के विकास की कीमत आदिवासी क्यों चुकायें? जो बाहरी वहाँ गये हैं पिछले 2-3 जनरेशन से, उनको बाहर करो, उनका पुनर्वास करो। आदिवासियों को नहीं।

ताराशंकर 
तस्वीर दीपक रंजीत की वाल से साभार