Sunday, May 27, 2018

धर्म का धंधा दिमाग को पंगु बनाये बिना संभव नहीं

धर्म का धंधा दुनिया में क्या क्या प्रपंच कर रहा है उसे देख कर आदमी हैरान परेशान हो जाता है। कुछ दिन पहले कहीं पढ़ा था, एक आतंकवादी अपने द्वारा फोड़े बमबारी में किसी तरह बच गया। अस्पताल में होश आया तो उसे लगा कि वह मर के स्वर्ग पहुँच गया है। ऩर्स को देखकर उसने उसे अप्सरा समझ लिया। उसने झट पूछ लिया दूसरी अप्सरायें किधर हैं ?” 


इराक, सीरिया, यमन, सुडान नाईजीरिया आदि देशों में नवयुवकों को धर्म के लिए लड़ कर मरने पर स्वर्ग में अप्सराएँ मिलती हैकह कर आतंकवादी दलों में शामिल किया जाता है और धर्म के नाम पर कहे गए लफ्फाजी को सच मान कर लाखों अपरिपक्व लोग मरने के लिए तैयार हो जाते हैं। धर्म के नाम पर न जाने कितने भ्रम फैलाये जाते हैं और लोग धर्म के फंदों में फंसते चले जाते हैं। स्वर्ग के अनंत सुख और अमर जीवन की चाहत धर्म के नाम पर अमानवीय होने के लिए दिमाग को पंगु बना देता है। 
भारत में फिलहाल गाय के नाम पर लोगों के दिमागों का हरण चालू है और बेसिर-पैर की बातों में आकर गौ रक्षा के नाम पर धार्मिक गुंडागर्दी और मोब लिंचिंग को अन्जाम दिया जा रहा है। 

इसको फंड कहाँ से मिल रहा है ? क्या माफिया उन्मुलन कानूनों का इस्तेमाल गौ रक्षा के नाम पर किए जा रहे आपराधिक कृत्यों को रोकने के लिए किया जाएगा ? महाराष्ट्र में गौ रक्षकों के पास भारी मात्रा में विस्फोटक प्राप्त हुए हैं, यह कौन का गाय प्रेम है
गाय रक्षकों का खौफ़ इतना बढ़ चुका है कि कृषि कार्य और दूध के लिए भी गाय बैल को खरीद कर एक जगह से दूसरी जगह लेने के लिए लोग साहस नहीं जुटा पा रहे हैं। न जाने गौ तस्कर के नाम पर कहाँ मॉब लिंचिंग का शिकार हो जाएँ। 

गाँवों के देश में गाय बैल पर आधारित अर्थ व्यवस्था को तोड़ने का यह कौन सा दुश्चक्र है ? कहीं ट्रेक्टर की मांग बढ़ाने की मार्केटिंग तो नहीं

गाय रक्षा दलों के सदस्यों के घरों में क्यों नहीं सड़कों पर विचरण करने वाले गायों को पहुँचाने की व्यवस्था की जाए, गुजरात माडल की तरह। 

खबिरया चैनलों के नाम पर दुकान खोले कुछ चैनल, धार्मिक अंधविश्वास को बढ़ावा देने का अभियान चलाए हुए हैं। ये कभी कभार इधर उधर से उधारी में लेकर न्यूज दिखाते हैं, लेकिन इनका मुख्य उद्देश्य पौराणिक, मध्य युगीन कहानियों, धर्म के कर्मकांड़ आदि के नाम अंधविश्वास फैलाना ही है। 

जब ये अंधविश्वास नहीं फैला रहे होते हैं तो ये कभी लडाई के सजो सामाऩ, टैंक, गोला बारूद या फिर मनोहर कहानियों पर आधारित कार्यक्रम दिखा रहे होते हैं। किसी भी तरह ये खबरिया चैनल के अपने घोषित धंधा करते हुए नज़र नहीं आते हैं। वास्तव में ये धर्म के बाजार को बढ़ाने के लिए धर्म के धंधेबाजों के तिकड़मी को अधिक प्रभावशाली बनाने के काम में लगे हुए हैं।
धर्म के ठगबाजी कार्यकलापों से लोगों के सोच को कुंद करने में अपनी भूमिका निभा रहे हैं। इसका एक ध्येय लोगों को सोचनीय खबरों के वंचित करके उन्हें जागरूक होने से रोकना भी है। 

धर्म के नाम पर चल रहे विश्वव्यापी धंधे से जब तक सभ्यता बाहर नहीं निकलेगा, दुनिया में मार काट चलते रहेगा। क्योंकि सिर्फ धर्म ने ही लोगों को साम्प्रादायिक भावनाओं से ओतप्रोत करके दुनिया में सबसे अधिक हिंसा फैलाया है। चाहे हिंसा अप्सरा पाने के लिए हों या गाय की रक्षा के लिए। धर्म के नाम पर हिंसा और हिंसक मानसिकता का पोषण अत्यंत खतरनाक बन गया है