Sunday, April 22, 2018

ऐसा लगता है, किसी अश्लील फिल्म में अभिनय कर रही हूं

तस्लीमा नसरीन की एक किताब आई थी लज्जा, जिसका नायक था, सुरंजन। कहानी बाबरी विध्वंस पर थी। तस्लीमा नसरीन को मुस्लिम समाज पसंद नही करता और हिन्दू समाज काफी पसंद करता है। आप उसको पसंद और न पसंद करने को ध्यान में रखकर पोस्ट पढ़ियेगा।
तस्लीमा शुरुआत में कहती हैं कि हमारे हिन्दू भाईयों ने सोचा नही कि बाबरी मस्जिद विध्वंस की गूंज बांग्लादेश सहित कई इस्लामिक देशों में सुनाई देगी और इसका फल इस्लामिक देशों में रहने वाले हिन्दू भाईयों को भुगतना पड़ेगा। आगे वह सुरंजन की कहानी कहती हैं। सुरंजन कट्टर हिन्दू नही था।


बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद बांग्लादेश में दंगें छिड़ गये। हिन्दुओं पर अत्याचार होने लगा। सुरंजन अपने बचपन में खोया हुआ था। रिक्शे पर बैठकर अपना उजड़ा शहर घूम रहा था। मन दुखी भी था। सभी हिन्दू बांगलादेश छोड़कर पलायन कर रहे थे पर सुरंजन का परिवार बांग्लादेश नही छोड़ना चाहता था। अन्ततोगत्वा कुछ दंगाई सुरंजन के घर में घुसते हैं और सुरंजन की बहन को खींचकर साथ ले जाते हैं। सुरंजन के बूड़े मां बाप कुछ नही कर पाते। सुरंजन उस वक्त घर पर नही था। जब सुरंजन को पता चलता है उसे बहुत बुरा लगता हैं। वह बहन को काफी ढ़ूढ़ता है। बहन नही मिलती तो निराशा में एक वैश्या को ले आता हैं। फ्रस्ट्रेशन में उसके ऊपर अत्याचार करता हैं। वह बहन का बदला लेना चाहता हैं। कहानी आगें बढ़ती जाती हैं और पता चलता हैं कि सुरंजन की बहन की लाश नग्न अवस्था में नहर में मिलती हैं।

यह तो रही तस्लीमा नसरीन की लज्जा। अब यह बताइए कि आरिफा वाले मसले पर यदि हिन्दू कट्टरपंथियों को सही मान भी लिया जाए कि कश्मीर से गुज्जर और जम्मू से रोहिंग्या मुसलमानों को भगाने के लिए यह सब हो रहा हैं तो क्या यह उचित हैं
कश्मीर जम्मू की समस्या महिलाओं का बलात्कार करके निपटाई जायेगी? क्या आप बांगलादेशियों को फॉलों कर रहे हैं? आपको यह हक किसने दिया? हिन्दुओं ने? आपने हिन्दुओं से पूछा? भारत में कितने प्रतिशत हिन्दू हैं? आपने उनकी राय ली? जब आपने राय नही ली तो आपको बलात्कार करने के लिये किसने प्राधिकृत किया?
बलात्कारियों के फेवर में तिरंगें लहराना, आरोप पत्र दाखिल न करने देना, महिला वकील को धमकाना, क्या यह विधि सम्मत कृत्य हैं?

यदि आरिफा के बलात्कार से आप सहमत हैं फिर तो अपनी मां के बलात्कार पर भी आपको सहमत होना चाहिए? अपनी मां के बलात्कार होने में हर्ज क्या हैं? कल को कोई आपकी मां और बहन के साथ बलात्कार करके , नग्न लाश नहर में फेंक देगा और यह साबित कर दिया जायेगा कि आप गुज्जर हैं। रोहिग्या मुसलमान हैं। फिर आप अदालत में चालीस साल साबित करते रहना कि आपकी मां गुज्जर नही है। ऐसे तो अब तक जितने बलात्कार हुए हैं, उसमें बचाव लिया जा सकता हैं कि अमुक लड़की रोहिग्या या गुज्जर मुस्लिम हैं।

भारत की ऐसी कौन सी किताब हैं, जिसमें नशे के इजेक्शन देना और बलात्कार करना, देशभक्ति का काम बताया गया हैं?

जम्मू कश्मीर में वैष्णों देवी मंदिर हैं। आठ साल की बच्ची को हिन्दू समाज में कन्या, देवी माना जाता हैं। लोग आस्थावश बच्चियों के पैर छूते हैं। अपराधियों ने देवी समान बच्ची के साथ ऐसा कर दिया? आपने पूरे हिन्दू समाज को शर्मिदा किया। जम्मू कश्मीर बार एसोसिएशन ने प्रदर्शन करके पूरे अधिवक्ता समाज के मुंह पर कालिख पोत दी। दम घुटता हैं काले कोट में। दलगत राजनीति में इतने गिर गये कि बच्ची की लाश, मातृशक्ति का समझौता करने लगें। आरिफा मुस्लिम बच्ची नही बल्कि हमारी अपनी मां थी। तुम लोगों में और कौरवों में कोई अंतर नही हैं। क्या कहे? कितनी गालिया बकें? गालियां भी शर्मिंदा हो जायेगीं।

पता नही कैसा समाज हो गया हैं। घर में बच्चों पर इन बातों का क्या असर पड़ता होगा। ये जो हाथ में लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं और महिला वकील को धमका रहे हैं, इनहे अच्छें तो वह लोग हैं जो रात के अंधेरे में अश्लील फिल्म देखते हैं। पता नही इनके घर में लड़किया हैं भी या नही! क्या सोचती होगीं बेटिया कि हमारे पापा बलात्कारियों के फेवर में प्रदर्शन करके आ रहे हैं।

अत्यन्त नीच लोग!!!! इस टॉपिक पर बात करना ही बेकार हैं। ऐसा लगता हैं जैसे मैं किसी अश्लील फिल्म में अभिनय कर रही हूं। शब्द भी नही मिल रहे है कि क्या लिखू?

शिवानी कुलश्रेष्ठ एवं फेसबुक से साभार