Tuesday, March 27, 2018

खाप पंचायतों द्वारा ऑनर किलिंग पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने ऑनर किलिंग के मामले की सुनवाई करते हुए खाप पंचायत पर बड़ा फैसला सुनाया है। सर्वोच्च अदालत ने कहा कि खाप पंचायत का किसी भी शादी पर रोक लगाना अवैध है। अदालत ने कहा कि अगर कोई भी संगठन शादी को रोकने की कोशिश करता है, तो वह पूरी तरह से गैर कानूनी है। 
2014 से लगभग 500 लोग, ज्यादातर महिलाएं ऑनर किलिंग के नाम पर मार दिये गए 

प्रत्येक वर्ष ऐसी खबरें अख़बारों में आती रहती हैं जिसमें पढ़ने को मिलता है कि गाँव की पंचायत अथवा गाँव के एक समूह द्वारा प्रेम करने तथा प्रेम विवाह करने के लिए सजा दे जाती है। कई मामलों में तो हत्या तक कर दी जाती है, खासकर अंतरजातीय प्रेम के मामलों में।
आज आजादी के लगभग सत्तर सालों के बाद भी जाति-व्यवस्था समाज से गया नहीं है। आज भी जाति को आधार बनाकर विवाह, सामाजिक सम्बन्ध और खानपान होता है। 
हालाँकि नई पीढ़ी ने ज़रूर इस भेदभाव वाली व्यवस्था को एक धक्का दिया है, लेकिन फिर भी जाति-पंचायतें युवाओं को अपनी ही जाति में प्रेम और शादी करने के आग्रह को लेकर कट्टर है। कई संगठन भी प्रेम और अंतरजातीय विवाह को लेकर ऐसा ही व्यवहार करती है। उनके नाम किसी से छुपे नहीं हैं, बजरंग दल, विश्वहिन्दू परिषद, आरएसएस आदि कुछ नाम गिनाये जा सकते हैं, जो एक तरफ देशभक्ति और संस्कृति की बात हिंसात्मक दर्जे तक करती है, दूसरी तरफ प्रेमी युगलों की पिटाई, उठक-बैठक कराना, जबरदस्ती शादी करवाना आदि।
प्रेम और विवाह हर व्यस्क युवा का अधिकार है। जाति, धर्म, गोत्र आदि की बंदिशें फिर समाज क्यों युवाओं पर जबरदस्ती लादता है। कई बार खाप पंचायतें मोबाइल फोन, बाहर शहर जाने, पढाई करने, जीन्स पहनने आदि का विरोध करती हैं। इसकी जद में उनका पूर्वाग्रह होता है कि इससे लड़कियाँ बिगड़ जाएँगी। दरअसल समाज और परिवार में भी अंतरजातीय विवाह और प्रेम को ठीक नहीं समझा जाता। इसके कई कारण हैं। पहला कि उससे पितृसत्ता कमजोर होती है और स्त्री-पुरुष की समता की बात मजबूत होती है। लड़की अपने विवाह के निर्णय खुद ले यह कोई माँ-बाप नहीं चाहता। लड़के का बाप भी ऐसा नहीं चाहता है। पंचायतें भी इसे समाज को तोड़ने और बहकाने वाला कृत्य समझती है। इनके डर दरअसल अपनी सत्ता को जाने और जाति-भेद ख़त्म होने को लेकर है। यदि जाति व्यवस्था कमजोर होंगी तो जाति-पंचायतें भी महत्वहीन हो जाएँगी।

पंचायतें प्रेम करने वाले युवाओं से क्यों डरती है? हम जानते हैं कि सत्ता की एक प्रवृति होती है, उसे बनाये रखने की। पुरुष स्त्री पर प्रभूत्व चाहता है, ऊँची जाति का व्यक्ति निम्न समझे जाने वाली जाति पर, पूंजीपति मजदूर पर, एक धर्म दुसरे धर्म पर, बड़े उम्र के लोग युवाओं पर आदि। सत्ता उन्हें सुविधायें और सहूलियत प्रदान करती हैं इसलिए इसे प्राप्त करने की और उसे बनाये रखने की कोशिश में, वह किसी भी हद तक जाने से भी नहीं चुकती।
ऑनर किलिंग इसी का एक उदहारण है। जहाँ जाति, धर्म, लिंग, पितृसत्ता आदि से जुडी सत्ता को हम तोड़ते हैं और बराबरी वाले समाज की दिशा में बढ़तें हैं, जो सत्ता को फूटी आँख भी नहीं सुहाता।
जब आप निम्न जाति के युवा हैं और उच्च जाति के सवर्ण युवा (युवा/युवती) से प्रेम करते हैं, मेल-जोल करते हैं और शादी करते हैं, तो उनका जाति और वर्ण-आधारित राजनीति को धक्का लगता है। जब प्रेम में आप जाति और वर्ण की दीवारें तोड़ते हैं और इंसानियत की समानता की भावना में यकीन करते हैं, तो जाति आधारित राजनीति को आप धक्का पहुंचाते हैं। धर्म और जाति के आधार पर पुरोहितवाद और ब्राह्मणवाद को चुनौती देते हैं। उन्हें लगता है कि आप व्यवस्था भंजक हैं जिस व्यवस्था में उनको एक विशेष स्थिति और सुविधा प्राप्त है, उनसे वह छीन जाता है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय बहुत ही स्वगे योग्य है। जहाँ सैकड़ों युवा हर साल प्रेम करने के लिए और अंतरजातीय विवाह के लिए मार दिए जाते हैं।
– शेषनाथ वर्णवाल