Sunday, February 04, 2018

स्त्री पैदा नहीं होती, बना दी जाती है

सीमोन द बुआ ने सच ही कहा है, "स्त्री पैदा नहीं होती, बना दी जाती है।"
हमारे समाज में जो महिलाओं की दोयम स्थिति है, शोषण और बंदीसें हैं; वह शुद्ध साजिस है - पितृसत्ता की। बचपन से ही महिला को जानबूझकर कमजोर बनाया जाता है। पुरुषों को आक्रामक बनना सीखाया जाता है। महिलायें उतनी हीं सक्षम हैं, जितनी पुरुष। ऐसे कई रिसर्च और सर्वे लगातार साबित करते जा रहे हैं। यह सकारात्मक है। कुछ मामले में तो पुरुषों से भी बेहतर हैं। पुरुष बच्चा पैदा नहीं कर सकता। अपना दूध नहीं पिला सकता। महीलायें कर सकती हैं। आज तक महिलाओं की क्षमता को अबतक अंडर-एस्टीमेट किया गया है। पर ऐसी खबरें बहुत सकारात्मक हैं और आशा जगाती हैं। ..कि बदलाव धीरे,-धीरे सही, पर समाज में घटित हो रहा है। स्त्री-पुरुष की समानता का सपना एक दिन जरूर सच होगा। जब पति (मालिक) और पत्नी नहीं, बल्कि एक दूसरे की संगी-साथी होंगी।