Sunday, February 04, 2018

मैने देखा कि गांधी जी जीवित है

यक्ष - आज रात बहुत भयानक स्वप्न आया राजन , मैने देखा कि गांधी जी जीवित है
युधिष्ठिर - बाप रे , इतना भयानक स्वप्न देखा आपने , गांधी का भूत देख , आप की नींद तो औचक टूट ही गयी होगी ....
यक्ष - ऐसा कुछ नही है , मैंने फिर आगे गोडसे को देखा ... वह अकेला नही था , खुले आम असलहा लिए , एक हुजूम को लेकर गांधी जी की ओर बढ़ा जा रहा था , उधर गांधी जी भी उसकी ही ओर बढ़े जा रहे थे .....उनके हाथ में एक गैलन था ... पेट्रोल से भरा ....
युधिष्ठिर - फिर ..
यक्ष - फिर गांधी जी चिल्लाये , बेटा नाथू , सारे संस्कार भूल गया है क्या , पहले पिस्तौल छिपा के रखी थी अब खुला लेकर आ रहा है और हां , ये भी बोल , चरण वरण तो छुयेगा या वो भी भूल गया ....
गोडसे ने कहा खुली पिस्तौल इसलिए लेकर आ रहा हूँ क्योंकि अब मुझे किसी का खौफ नही है , रही बुजुर्गों के चरण स्पर्श की बात , वो तो अवश्य करूंगा , ये तो हमारी संस्कृति है , परम्परा है , उसे कैसे भूल सकता हूँ ,
फिर वह गांधी जी के चरण स्पर्श के लिए झुका और तभी ...
युधिष्ठिर - क्या हुआ ... तब क्या हुआ यक्ष , नींद खुल गयी क्या ...
यक्ष -
नही , नींद नही खुली ....मैंने देखा कि गांधी जी ने चरण छूने झुके गोडसे और खुद अपने अपने ऊपर पेट्रोल का गैलन उलट कर लाइटर के ट्रिगर पर हाथ रख दिया गोडसे के कुछ समझ मे न आया , पेट्रोल से भीगी देह और गांधी जी के हाथ में लाइटर देख , थर थर कांपने लगा , पिस्तौल उसके हाथ से गिर गई ....

वह हाथ जोड़े गिड़गिड़ाने लगा ... प्लीज़ गांधी जी आप तो सच्चे हिन्दू हो , अहिंसा के पुजारी , आप हिंसा कैसे कर सकते है बापू .... आत्मदाह करना चाहते है तो मुझे क्यो साथ में जलाएंगे , आपको ब्रह्म हत्या का पाप लगेगा , प्लीज़ बापू लाइटर फेंक दो ....और मुझे जाने दो .... मैं फिर न खुद ऐसा करूंगा , न ही ऐसी किसी भीड़ का हिस्सा बनूंगा ....
युधिष्ठिर - फिर गांधी जी ने क्या किया ..?
यक्ष -
गांधी जी तो बापू थे गोडसे का हृदय परिवर्तन देख पिघल गए , उसे उठाया गले से लगाया , उसकी पिस्तौल उसे वापस दी और उससे कहा , नाथू बेटा , जरा पीछे मुङो और यही पिस्तौल उनकी तरफ तान के उसी तरह , उनकी ओर बढ़ो ... जैसे मेरी ओर बढ़ रहे थे ..
गोडसे गांधी के पैरों पर गिर पड़ा , कहने लगा ऐसा करने के लिए मुझ से न कहें बापू , वो हमारे अपने है , हमारे धर्म के है , हमने हिन्दू राष्ट्र बनाने और साथ जीने मरने की कसम खाई है ..... मैं उनसे घात नही कर सकता बापू ...
युधिष्ठिर -
तब गांधी जी ने क्या किया ...
यक्ष -
तब गांधी जी ने कहा कि मैं तुम्हे हिंसा के लिए नही कह रहा , मैँ सिर्फ तुम्हे उनकी ओर पिस्तौल ताने बढ़ने के लिए कह रहा हूँ ... गोडसे ने कहा कि बापू आप ठीक कह रहे है परंतु पीछे भीड़ है उनमें से कईयों के पास असलहे है , कहीं मुझे देख उन्हें कोई भरम न हो जाये और वो मुझे ही न गोली मार दे ...
युधिष्ठिर -
गोडसे की बात तो ठीक है .. भीड़ का क्या ठिकाना ... लेकिन गांधी जी ने क्या कहा ...
यक्ष -
गाँधी जी ने तब कुछ नही कहा ... बस लाइटर के ट्रिगर पर अंगूठा रख उसे दबाने जा ही रहे थे कि गोडसे चीखा , नही नही बापू ....हम दोनों जल कर मर जायेंगे , मैं आपकी बात मान ले रहा हूँ | गांधी जी रुक गए ... गोडसे पिस्तौल ताने पीछे मुड़ा ....
युधिष्ठिर - फिर !! फिर क्या हुआ ...
यक्ष - गोडसे पीछे मुड़ा तो उसने देखा कि , पीछे कोई नही था .....
(सारी भीड़ गाँधी के अपने ऊपर गैलन पलटने के साथ ही , चुप चाप तितर बितर हो चुकी थी ....उसने मुड़ कर गांधी जी को देखा , गाँधी दूर चले जा रहे थे ... गोडसे ठगा सा महसूस कर अवाक खड़ा रहा कुछ देर , और फिर फुट फुट कर रोने लगा ....)
युधिष्ठिर -
अरे ! ये क्या .......और फिर आपकी नींद टूट गयी |
यक्ष -
नही ! मेरी नींद तब भी नही टूटी | मैंने देखा कि ...
युधिष्ठिर -
तो क्या आप ये सब नींद में बड़बड़ा रहे है ... अरे उठिए ... आप कोई भयानक ख्वाब नही देख रहे है , आप तो आज का सच देख रहे है ....उठिए उठिए ...
यक्ष -
अरे , ये कौन झिंझोड़ रहा है मुझे ... कहां है गोडसे , अरे उसे कोई चुप तो कराओ ... उसे बहुत पछतावा हो रहा है , वह बिल्कुल अकेला पड़ गया है .... अरे कहां है वो ... अभी तो यहीं रो रहा था ....
युधिष्ठिर -
आप भरम में है यक्ष , आंख खोलिये , कहीं कोई गोडसे नही रो रहा , उसे तो तभी फांसी हो गई थी ...
यक्ष -
क्या वह अकेला नही पड़ा है , क्या उसके साथ अब भी सब खड़े है ....
युधिष्ठिर - लगता है अब आपकी आंखें खुल रही है | रही बात अकेले पड़ने की , तो अकेला तो वह पड़ ही चुका था | गोडसे को तो तभी सबने disown कर दिया था | उनका काम जो हो चुका था ....
यक्ष -
तो क्या वह अकेला होने पर भी रो नही रहा था ?
युधिष्ठिर -
उसे रोने का टाइम ही कहां मिला , कोर्ट कचहरी , थाने पुलिस के चक्कर मे उसे मौका ही कहा था ... फिर उसे फांसी हो गई .....
यक्ष -
तो राजन ! ये बताओ , अगर उसे मौका मिलता तो क्या वह अपनों द्वारा disown किये जाने पर रोता ...??
युधिष्ठिर -
माफ करें ! इस यक्ष प्रश्न का उत्तर मेरे पास नही , समय के पास है | समय आने दीजिये , वह इसका उत्तर अवश्य देगा ..
Pankaj Mishra की वाल
वाया : 
Himanshu Kumar